Saturday, November 13, 2010

भूल ना पाती वो नाते

कुछ पंक्तियाँ यूँ लिखी किसी ने कि मन हुआ विचलित....
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कुछ नींदें कुछ स्वप्न चुरा कर जब तुमसे करती बातें,
सज जाती हैं बंद पलक पर, विगत दिनों की बरसातें,
बूँद - बूँद सिमटे जाते पल भीग-भीग कर गीला मन,
सुधियों की कैसी बदली जो, भूल ना पाती वो नाते ||
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पढ़ इन पंक्तियों को विचार कुछ उमड़े ह्रदय में| उठा कलम लिख दीं कुछ पंक्तियाँ हमने भी -

भूल ना पाती वो नाते, आखों में जो स्वप्न जगाते
अधरों पर सिमट सी जाती बरसात कि वो कोमल बूंदें
ह्रदय में यूँ सिमट जाते पल वो जो यूँ बीते
कुछ बीते तेरी बांहों कुछ बीते तेरी पलकों में

स्वप्न में जब तुम आती, मेरे ह्रदय में बस जाती
अपनी काली लंबी लटों से, घटाओं सा स्पर्ष कराती
भूल ना पाती वो नाते, आँखों में जो स्वप्न जगाते
कुछ नींदें कुछ स्वप्न चुरा कर हम तेरी यादों में खो जाते

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